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‘कायर कहलाने से बेहतर है मौत’, 4 महीने में 23वीं फांसी की सजा सुनाने वाले जज ने किसे दी चुनौती?

 Written By: Khushbu Rawal
 Published : Sep 08, 2026 03:50 pm IST,  Updated : Sep 08, 2026 03:50 pm IST

4 महीने में 23वीं फांसी की सजा सुनाने वाले जज ने एक ऐसी कड़ी टिप्पणी की है, जो चर्चा का विषय बन गई। माफियाओं और गैंगस्टरों को सख्त चेतावनी देते हुए जज ने कहा कि मैं सिर्फ ईश्वर से डरता हूं। मौत को गले लगा लूंगा, लेकिन कायर नहीं कहलाऊंगा।

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जज ने 4 महीने में 23वीं फांसी की सजा सुनाई। Image Source : PEXELS

यूपी के मुजफ्फरनगर के अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर ने दहेज हत्या के एक मामले में सोमवार को मृत्युदंड का फैसला सुनाते हुए कहा कि वह ''कायर जज कहलाने के बजाय मौत को गले लगाना पसंद करेंगे।'' बता दें कि पिछले 4 महीने में उनके द्वारा सुनाया गया यह 23वां मृत्युदंड है।

दरअसल, दहेज की मांग को लेकर पत्नी को जिंदा जलाने के दोषी एक व्यक्ति को मृत्युदंड की सजा सुनाते हुए त्वरित अदालत के जज ने कहा कि वह अपने न्यायिक कर्तव्यों का निर्वहन करते हुए ''माफियाओं, गैंगस्टरों या अपराधियों के दबाव में'' नहीं आएंगे। न्यायाधीश दिवाकर ने कहा कि उनके माता-पिता ने उन्हें केवल ईश्वर से डरना सिखाया है। उन्होंने कहा कि यदि वह अपने न्यायिक कर्तव्यों का पालन करते हुए ''बाहुबलियों, माफियाओं, गैंगस्टरों या अपराधियों'' से डर जाएंगे तो न्यायपालिका में जनता का विश्वास समाप्त हो जाएगा।

'सिद्धांतों से समझौता नहीं करूंगा'

अपने फैसले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने कहा, ''मैं कायर जज कहलाने के बजाय मौत को गले लगाना पसंद करूंगा'' और जब तक अपने सिद्धांतों का पालन कर सकता हूं, तब तक सेवा करता रहूंगा।

न्यायाधीश ने यह भी कहा कि उन्हें माफियाओं और अपराधियों से धमकियां मिल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि माफियाओं और अपराधियों को लाभ पहुंचाने के लिए उनकी अदालत से लगभग 100 गंभीर मामलों को वापस ले लिया गया है। ऐसा समझा जाता है कि रवि कुमार दिवाकर ने मुजफ्फरनगर में अपनी सुरक्षा कम किए जाने का आरोप लगाते हुए सीनियर अधिकारियों से सुरक्षा की मांग की है।

क्या है पूरा मामला?

शासकीय अधिवक्ता कुलदीप कुमार के अनुसार, सोमवार के मामले में न्यायाधीश दिवाकर की अदालत ने अभियुक्त नदीम को IPC की धारा 302 और 504 के तहत दोषी ठहराया और उस पर एक लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया। यह मामला 23 जुलाई 2018 को शाहपुर कस्बे में दहेज की मांग को लेकर नदीम द्वारा अपनी पत्नी शहजादी (23) को जला देने से संबंधित है।

शहजादी को गंभीर हालत में दिल्ली के सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया था, जहां बाद में उसकी मौत हो गई थी। मौत से पहले दर्ज कराए गए बयान में शहजादी ने आरोप लगाया था कि नदीम ने उसे जलाया था। उन्होंने बताया कि मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष के सभी 11 गवाह मुकर गए, लेकिन कोर्ट ने शहजादी के मृत्युपूर्व बयान के आधार पर नदीम को दोषी ठहराया।

11 मामलों में 23 लोगों को मृत्युदंड

न्यायाधीश दिवाकर की अदालत ने पिछले चार महीनों में 11 मामलों में 23 लोगों को मृत्युदंड दिया है। इससे पहले अगस्त में, उनके सामने लंबित हत्या के लगभग 100 मामलों को एक प्रशासनिक आदेश के माध्यम से जिला एवं सत्र न्यायाधीश वीरेंद्र कुमार सिंह की अदालत में ट्रांसफर कर दिया गया था। जिला बार एसोसिएशन के अध्यक्ष प्रमोद त्यागी ने कहा था कि मामलों का ट्रांसफर वकीलों और वादियों के बीच त्वरित अदालत द्वारा मृत्युदंड दिए जाने की आशंका के बीच हुआ।  

वहीं, आपको बता दें कि हाल ही में मुंबई से भी एक हैरान कर देने वाली घटना सामने आई थी। दादर इलाके में उपद्रवियों का मनोबल इतना बढ़ गया है कि उन्होंने बीच सड़क पर जज की गाड़ी को घेरकर उन्हें जान से मारने की धमकी दे दी

(इनपुट- PTI)

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